अजमेर जिले के अरांई क्षेत्र के श्रीरामपुरा गांव में हुए चौहरा हत्याकांड मामले में गिरफ्तार पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी की पहली पत्नी सुनीता और बेटी सरिता को अवकाशकालीन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने सुनीता का पुलिस रिमांड दो दिन बढ़ा दिया, जबकि बेटी सरिता को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। वहीं, मामले में निरुद्ध किशोर को पहले ही बाल सुधार गृह भेजा जा चुका है।
कुएं से हथियार की तलाश
जांच के दौरान पुलिस ने रामसिंह चौधरी के घर के पास स्थित कुएं का पानी निगरानी में निकलवाया। ग्रामीणों का कहना है कि वारदात में प्रयुक्त हथियार की तलाश के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
घटना का विवरण
गौरतलब है कि 28 मई को श्रीरामपुरा गांव में पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी, उनकी मां पूसी देवी, दूसरी पत्नी सुरज्ञान देवी और मौसेरी बहन महिमा की निर्मम हत्या कर दी गई थी। वारदात को हादसे का रूप देने के लिए उन्हें कार में जला दिया गया। पुलिस ने उसी दिन मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों को हिरासत में ले लिया था।
सामाजिक प्रतिक्रिया
कासीर प्रशासक भागचंद चौधरी ने कहा कि इस घटना को केवल अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि परिवार और बच्चों के बीच बदलती परिस्थितियों को समझना होगा। उन्होंने बच्चों को संस्कार और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई।
जिला देहात कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष और रामसिंह चौधरी के मित्र जसराज चौधरी ने कहा कि यह घटना समाज के लिए गंभीर चिंतन का विषय है। उनके अनुसार समय से पहले बच्चों को मोबाइल फोन और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना तथा परिवारों में संवाद की कमी सामाजिक दूरी का कारण बन रही है।
चौपालों पर चर्चा
गांव धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है, लेकिन चौहरा हत्याकांड की टीस अब भी लोगों के मन में बनी हुई है। चौपालों पर ग्रामीण केवल वारदात की चर्चा ही नहीं कर रहे, बल्कि बच्चों के व्यवहार, मोबाइल की लत, पारिवारिक संवाद की कमी और बदलते सामाजिक परिवेश पर भी विचार-विमर्श कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि परिवारों में संवाद और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।